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 बुंदेलखंड :- थडूला  सामग्री :  500  ग्राम खड़े काले उड़द (साबु त), 4-5  हरी मिर्च, 8-9 लहसुन की कली, अदरक एक बड़ा टुकड़ा, थोड़ी-सी लाल मिर्च, नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल।  विधि :  सबसे पहले काले उड़द को पीस कर छान लें। अब हरी मिर्च, लहसुन और अदरक का पेस्ट तैयार कर लें। छने हुए आटे में तैयार पेस्ट, लाल मिर्च एवं स्वादानुसार नमक मिलाकर आटा गूंथ लें। इसे 10-15 मिनट ढंककर रखें।  तत्पश्चात आटे की छोटी-छोटी लोई बनाकर पूरी की तरह बेल लें।  अब एक कड़ाही में तेल गरम करके, कुरकुरी पूरियां तल लें और दही का रायता, हरी चटनी एवं जीरावन के साथ पेश करें। खाने में स्वादिष्ट यह थडूला (पूरियां) आपको जरूर पसंद आएंगी। एक बार ट्राय अवश्य करें। 
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बुन्देलखण्डी आँवरिया कढ़ी (करी/सूप) व्यंजन का प्रकार:  करी/सूप यह एक अत्यंत लोकप्रिय और स्वादिष्ट स्वस्थयवर्धक व्यंजन है, हम लोग इसे आंवले की कढ़ी भी कहते हैं। इसे बनाने के लिये सबसे पहले सूखे हुये आंवलों की कलियों को शुद्ध घी अथवा सरसो के तेल में भूनकर कर सिल-बट्टे की मदद से पीसा जाता है। इसके बाद बेसन को पानी में घोलकर किसी बर्तन में चूल्हे पर चढ़ा देते हैं और उसी में आंवलों का तैयार किया हुआ चूर्ण (मिश्रण) डाल देते हैं। थोडे से घी या तेल में पहले थोडी हींग फ़िर जीरा, लाल मिर्च, प्याज एवं लहसुन (पिसे हुये), आदि सामान्य मसाले मिलकर मध्यम आंच में पकायें । मसाले पकने के बाद मिश्रण को मसाले में मिला दें, नमक स्वादानुसार मिलायें है। ध्यान रखें की कढ़ी को बीच-बीच मे हिलाते रहें, जिससे यह बर्तन मे नीचे लगने ना पाये, इसे रोटियों या फ़िर चावल के साथ गरमा-गरम परोसें। 
बुन्देलखण्डी पूरी के लड्डू व्यंजन का प्रकार:  मिठाई प्राय: ग्रामीण परिवारों मे ही इन लड्डुओं स्थान रह गया है, ये तकरीबन बूंदियों से बनने वाले लड्डुओं जैसे होते हैं। निर्धन परिवार ही बूंदी के लडूओं के जगह इनका उपयोग करते है। पारम्परिक तौर पर, त्यौहारों पर या फ़िर बुलावा (बुलउआ) इत्यादि अवसरों पर इनका खूब इस्तेमाल होता है। इसे बनाने के लिये बेसन की बड़ी-बड़ी एवं मोटी पूड़ियां बना ली जाती हैं और बाद में तेल में सेंककर महिलायें अपने हाथों से ही इसे बारीक-बारीक मसल (मींज) लेती है। फिर उन्हें चलनी जैसे बर्तन से छानकर कढाही में घी के साथ भूना जाता है। बाद में गुड़ की चाशनी या फ़िर शक्कर डाल कर हाथों से लड्डुओं को बांधा जाता है। इसे और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिये इनमें इलायची या काली मिर्च को भी पीसकर मिलाया जा सकता है जिससे इनका स्वाद और भी बढिया हो जाता है।
बुन्देलखण्डी बुकनू व्यंजन का प्रकार:  नमक/मसाला यह एक मिला जुला मसालेदार नमक है। आयुर्वेद के हिसाब से कई लोग ये मानते हैं की बुकनू के कई औषधीय गुण भी है। इसे बनाने के लिये कुछ मसाले व जडी-बूटियों की आवश्यक्ता होती है जैसे - हल्दी Haldi (Turmeric), काला नमक Black Salt, सोंठ Sonth (dried ginger powder), जीरा Jeera (Cumin seeds), हर्र (बडी और छोटी) Harra , बहेडा Baheda, Marodfali, Baibirnag, Peepar, हींग Hing (asafoetida), आंवला Amla, सरसो के तेल (मसालों को तलने के लिए) Oil. सभी मसालों को तेल में भूरा होने तक पकायें, बहुत अधिक ना पकायें। jo aapko masale ki dukan par aaram se mil sakti hai. सभी मसालों को काले नमक और समान्य सफ़ेद नमक के साथ मिला कर पीस लें। एक हवा बंद बरतन में सहेजें। kanch ki bottle jyada thik rahegi. यह सालों-साल चलता है और अत्यन्त ही स्वादिष्ट लगता है। बुकनू को कढी-चावल, घी-रोटी, और पूरी या पराठा के साथ खा सकते है ।